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-:"परम्परा का स्ववागत,एक हद तक ":-

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परम्परा की स्वागत होनी चाहिए,लेकिन सीमा निर्धारण के अंदर।                              लोग क्या कहेंगे,–के अंजाने भय के चलते बहुत से लोग जीवन में उन्नति नहीं कर पाते।क्योंकि वे समाज में प्रचलित परंपराओं से इतना प्रभावित हो गए होते हैं,की जीवन में सही– गलत का भी ठीक तरह से परीक्षण नहीं कर पाते और फिर वही करते है जो समाज ने उन्हें इजाजत दे रखी है।इस प्रकार से ऐसे लोगों को अनेक तरह के कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है,और वे उन्नति के शिखर तक नहीं पहुंच पाते।                         आप हर क्षण जो निर्णय लेते है,उससे आपके भाग्य का निर्माण होता है।                      जिस प्रकार क्या पढ़ें से ज्यादा महत्वपूर्ण है क्या न पढ़ें,उसी प्रकार महत्वपूर्ण है क्या करें और कया न करें,क्या बोलें और क्या न बोलें।                         ‘सफलता का मूल मंत्र स्...